KSP Health is involved in several quality programs to help maintain focus on quality of care and have accountability to deliver that high quality of care.
Title Image

अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Ultra-Processed Foods) बच्चों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं?

ultra-foods-child
May 16, 2026

अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Ultra-Processed Foods) बच्चों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करते हैं?

  1. V. मुथुकुमार, MD
    CEO और संस्थापक, KSP Health
    आधारित: JAMA Network Open. 2026;9(3):e260434


    🌿 परिचय: शुरुआती वर्ष और आधुनिक आहार 🙂

    पूर्व-स्कूली वर्ष (Preschool years) बच्चे के मस्तिष्क और भावनात्मक विकास के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण समय होता है। 3 या 4 साल की उम्र में बच्चा कैसा व्यवहार करता है—चाहे उनमें अधिक चिंता, आक्रामकता या अति-सक्रियता (Hyperactivity) हो—इसका उनके भविष्य के स्वास्थ्य और खुशी पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि कुछ व्यवहारिक चुनौतियाँ बड़े होने का एक सामान्य हिस्सा हैं, लेकिन लगातार दिखने वाले लक्षण भविष्य में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संघर्षों के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। 🙂

    विश्व स्तर पर, मानसिक स्वास्थ्य विकार विकलांगता का एक प्रमुख कारण हैं। चिंता की बात यह है कि बच्चों में भी इन समस्याओं की दर बढ़ रही है। इस कारण, वैज्ञानिक उन कारकों की पहचान करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए बदला जा सकता है। इसमें “आहार” (Diet) एक शक्तिशाली और परिवर्तनकारी कारक है। 🌿

    आज, बच्चे जो खाते हैं उनमें से अधिकांश प्राकृतिक भोजन नहीं है। शोधकर्ता इन्हें “अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ” (Ultra-Processed Foods – UPFs) कहते हैं। ये मुख्य रूप से औद्योगिक रूप से तैयार किए जाते हैं जिनमें खाद्य पदार्थों से निकाले गए पदार्थ (जैसे स्टार्च और चीनी) और कृत्रिम स्वाद (Additives) मिलाए जाते हैं। उदाहरण के लिए: चिकन नगेट्स, मीठे अनाज (Cereals), पैकेट वाले बिस्कुट, सोडा और इंस्टेंट नूडल्स। इन्हें सस्ता और स्वादिष्ट बनाया जाता है, लेकिन इनमें चीनी, अस्वास्थ्यकर वसा और नमक अधिक होता है, जबकि फाइबर और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है। 🍪🥤


    🔬 शोध पद्धति: यह अध्ययन कैसे किया गया?

    कनाडा में 2,000 से अधिक बच्चों के जन्म से लेकर उनके विकास तक का अनुसरण करते हुए यह अध्ययन (CHILD Cohort Study) किया गया। जब बच्चे 3 साल के थे, तब उनके माता-पिता ने पिछले एक साल के उनके खान-पान का विस्तृत विवरण दर्ज किया। 🙂

    दो साल बाद, जब बच्चे 5 साल के हुए, तब माता-पिता से उनके व्यवहार के बारे में सवाल पूछे गए। इसमें मुख्य रूप से दो पहलुओं पर ध्यान दिया गया:

    1. आंतरिक लक्षण (Internalizing symptoms): चिंता, उदासी और डर जैसी मन के भीतर की समस्याएं। 😟
    2. बाहरी लक्षण (Externalizing symptoms): आक्रामकता, नखरे करना और अति-सक्रियता जैसी बाहरी समस्याएं। 😠

    पारिवारिक आय, माता की शिक्षा, स्तनपान का इतिहास और बच्चे की शारीरिक गतिविधि जैसे अन्य कारकों को भी इस अध्ययन के परिणामों में शामिल किया गया। 📊


    📊 शोध के परिणाम

    1. UPF का अत्यधिक उपयोग: अध्ययन में शामिल कनाडाई बच्चे अपनी दैनिक कैलोरी का औसतन 45.5% हिस्सा इन प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से प्राप्त कर रहे थे, जो कि एक उच्च संख्या है। 🍔
    2. खराब व्यवहार के साथ संबंध: परिणाम स्पष्ट थे: जिन बच्चों ने 3 साल की उम्र में अधिक UPF खाया था, उनमें 5 साल की उम्र में चिंता, अवसाद, आक्रामकता और ध्यान की कमी (Inattention) के लक्षण अधिक पाए गए। 😟
    3. प्राकृतिक भोजन का महत्व: शोधकर्ताओं ने पाया कि यदि बच्चा अपने आहार में केवल 10% प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को कम करके उनकी जगह फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल करता है, तो उनके व्यवहार संबंधी समस्याओं में काफी सुधार होता है। 🍎🥦
    4. मीठे पेय पदार्थों का खतरा: 3 साल की उम्र में सोडा और मीठे पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने वाले बच्चों में 5 साल की उम्र में मानसिक तनाव और व्यवहार संबंधी समस्याएं होने की संभावना सबसे अधिक देखी गई। 🥤⚠️

    🧠 ये खाद्य पदार्थ व्यवहार को क्यों प्रभावित करते हैं?

    • पोषक तत्वों की कमी: प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खाने से बच्चों को मस्तिष्क के विकास के लिए आवश्यक ओमेगा-3, आयरन, जिंक और बी-विटामिन नहीं मिल पाते हैं। 🧠
    • पेट और मस्तिष्क का संबंध: ये खाद्य पदार्थ पेट के अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे शरीर और मस्तिष्क में सूजन (Inflammation) हो सकती है, जो अवसाद और चिंता का कारण बनती है। 🦠
    • रासायनिक प्रभाव: पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाले रसायन (जैसे Bisphenols) बच्चे के विकसित हो रहे तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। ⚗️


    👨‍👩‍👧 माता-पिता के लिए सलाह

    • छोटे बदलाव करें: आपको पूरी तरह से बदलने की ज़रूरत नहीं है। धीरे-धीरे प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों को कम करें और उनकी जगह अंडे, दही, फल और सब्जियां शामिल करना शुरू करें। 🍳🥛🍌
    • डॉक्टरों की भूमिका: बच्चों के व्यवहार संबंधी समस्याओं पर चर्चा करते समय, डॉक्टरों को उनके खान-पान की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। 👨‍⚕️
    • नीतिगत बदलाव: स्कूलों और बाल देखभाल केंद्रों में स्वस्थ भोजन के मानकों को सुनिश्चित करने के लिए सरकारी स्तर पर कड़े कदम उठाए जाने चाहिए। 🏫


    🌟 निष्कर्ष

    यह अध्ययन साबित करता है कि 3 साल की उम्र में अधिक प्रसंस्कृत भोजन खाना, 5 साल की उम्र तक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और व्यवहार को प्रभावित करता है। अपने बच्चों को शुरुआत से ही प्राकृतिक और संपूर्ण भोजन देना न केवल उनके शारीरिक विकास के लिए, बल्कि उनके भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। 🙂


    जय हिंद! 🇮🇳


    📚 References:

    https://jamanetwork.com/journals/jamanetworkopen/fullarticle/2845768
    https://childrens.dartmouth-health.org/kids-health/how-foods-impact-behaviors#:~:text=Replacing%20processed%20foods%20with%20whole,and%20improve%20behavior%20over%20time.
    https://www.frontiersin.org/journals/public-health/articles/10.3389/fpubh.2025.1590083/full
    https://www.news-medical.net/health/Why-Ultra-Processed-Foods-May-Affect-Kidse28099-Attention-and-Learning.aspx
    https://www.youtube.com/watch?v=FsQeV6lvobk